CG Mungeli News: मुंगेली। मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र अंतर्गत कंचनपुर-चंदपुरा परिसर के संरक्षित वन क्षेत्र में एक तेंदुए का शव मिलने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग ने अपनी प्रारंभिक जांच में तेंदुए की मौत का कारण वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष बताया है, लेकिन ग्रामीणों के दावों और घटना की परिस्थितियों ने कई नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

वन विभाग के अनुसार 16 जून की शाम करीब 7:30 बजे कक्ष क्रमांक 1529 में तेंदुए के मृत होने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलने के बाद क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाई गई और अगले दिन वरिष्ठ अधिकारियों तथा वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने मौके का निरीक्षण किया।

वहीं, स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगल की ओर से वन्यजीवों के संघर्ष की तेज आवाजें पहले ही सुनाई दी थीं और इसकी जानकारी वन अमले को भी दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते मौके तक नहीं पहुंच पाना और घटना की जानकारी देर से मिलना विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े कर रहा है।

घटनास्थल की जांच के दौरान वन विभाग को अवैध शिकार से जुड़ा कोई हथियार या अन्य संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। काना पेंडारी मिनी जू के वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा किए गए परीक्षण में मृत तेंदुए की उम्र लगभग 14 से 16 वर्ष आंकी गई है। शरीर पर मिले चोट के निशानों के आधार पर प्रथम दृष्टया वन्यजीवों के आपसी संघर्ष में मौत होने की आशंका व्यक्त की गई है।

हालांकि वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र में एक बड़े वन्यजीव की मौत होना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि वन विभाग की निगरानी और गश्त व्यवस्था अधिक प्रभावी होती तो घटना की जानकारी समय रहते मिल सकती थी। साथ ही जंगल में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्थापित तंत्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

वन विभाग का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की गई है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है। लेकिन कंचनपुर के जंगल में तेंदुए की मौत ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण, निगरानी तंत्र और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी है।

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By admin