आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलीमर के करेंसी नोट लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. माल्होत्रा ने कहा कि यह प्रस्ताव फिलहाल प्रारंभिक चरण में है. बता दें कि पहले भी प्लास्टिक के नोट लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब ये प्रयास सफल नहीं हुआ था. साल 2012 में क्यों हुआ फेल? बता दें कि भारत ने फरवरी, 2012 में भी 5 शहरों (कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला) में प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट का टेस्ट किया था. लेकिन एटीएम और मशीन की वजह से काफी परेशानी हुई, तो इसे नहीं रोकना पड़ गया. पॉलीमर करेंसी क्या है? पॉलीमर करेंसी, पॉलीमर बैंकनोट कपास के बजाय पलते, लचीले प्लास्टिक सबस्ट्रेट से बनाए जाते हैं. ये नोट Bi-axially Oriented Polypropylene (BOPP) से बनते हैं. पॉलीमर नोट कार्ड जैसे हार्ड नहीं होते हैं, इसलिए इन्हें कागज के नोट जैसे मोड़ा भी जा सकता है. पॉलीमर करेंसी की खासियत क्या है? पेपर करेंसी के उलट पॉलीमर या प्लास्टिक नोट ज्यादा टिकाऊ होते हैं. पॉलीमर करेंसी पर गंदगी और नमी का असर कम होता है. पॉलीमर करेंसी की ज्यादा लंबी उम्र की वजह से बार-बार नोट छापने की जरूरत कम हो जाती है. किन देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक के नोट? भारत में इस करेंसी का आना कोई नई बात नहीं होगी. ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया था. इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और रोमानिया में भी पॉलीमर करेंसी यूज होने लगीं. शेयर करें Post navigation सोने-चांदी में भारी गिरावट, ₹15000 तक टूटे दाम दिल्ली में देश का पहला E-85 फ्यूल स्टेशन लॉन्च