Chhattisgarh Dhamtari News : धमतरी। सनातन परंपरा में नागों को देवत्व का प्रतीक माना जाता है। इसी आस्था और परंपरा से जुड़ा धमतरी शहर के हटकेश्वर वार्ड में स्थित प्राचीन नाग मंदिर अपने आप में खास महत्व रखता है। करीब 11वीं शताब्दी पुराना बताए जाने वाले इस मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाग देवता के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। नाग पंचमी पर्व का उल्लेख महाभारत के आदि पर्व और श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में मिलता है। मान्यता के अनुसार, इसका संबंध राजा परीक्षित और तक्षक नाग की कथा से है। राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने नाग जाति के विनाश के लिए सर्प सत्र यज्ञ कराया था। इसी दौरान आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रुकवाकर नागों को अभयदान दिलाया। मान्यता है कि जिस दिन यह यज्ञ रुका, वह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। तभी से नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की परंपरा चली आ रही है। धमतरी के हटकेश्वर वार्ड स्थित इस प्राचीन नाग मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मंदिर करीब 11वीं शताब्दी पुराना बताया जाता है और यहां स्थापित प्राचीन नाग प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। नाग पंचमी के अवसर पर अलसुबह से ही मंदिर में भक्तों की कतार लग जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार नाग देवता इस क्षेत्र की रक्षा करते हैं। लोगों का दावा है कि आज तक इस इलाके में सर्पदंश से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता के स्वयं दर्शन देने की भी मान्यता प्रचलित है। इसी आस्था के चलते धमतरी के अलावा छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि मंदिर में नाग देवता की पूजा और दर्शन करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नाग पंचमी के अलावा भी सालभर श्रद्धालुओं की मंदिर में आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों के लिए यह प्राचीन नाग धाम धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शेयर करें Post navigation Raipur News : 25 साल के ‘छोटू’ पर टिकी वन भैंसों का कुनबा बढ़ाने की उम्मीद, तीन मादाओं से होगा प्रजनन Raipur News : कृषि कॉलेजों में एडमिशन का मौका, 20 से 22 अगस्त तक दस्तावेजों का होगा परीक्षण