UCC in Chhattisgarh: रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति ने अब आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और विभिन्न समुदायों से सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। इच्छुक लोग 15 अक्टूबर तक अपने सुझाव भेज सकते हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति राज्य में यूसीसी की आवश्यकता, उसकी रूपरेखा और व्यक्तिगत सिविल कानूनों से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं का व्यापक अध्ययन करेगी। समिति प्राप्त सुझावों के आधार पर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपेगी।

समिति में ये सदस्य शामिल

जून में गठित इस समिति में अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई के अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं।

इन माध्यमों से भेज सकते हैं सुझाव

समिति ने नागरिकों से ई-मेल, वेब पोर्टल और डाक के माध्यम से सुझाव भेजने की अपील की है।

  • ई-मेल: ucc-chhattisgarh@cg.gov.in
  • वेब पोर्टल: https://ucc.cgstate.gov.in
  • डाक पता: कार्यालय, समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-201, रायपुर, छत्तीसगढ़-492001

कई राज्यों में लागू हो चुका है UCC

देश में उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना था। इसके अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कांग्रेस ने जताया विरोध

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य में यूसीसी की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी आदिवासी है और यहां राष्ट्रपति द्वारा मान्यता प्राप्त विशेष जनजातीय समुदाय भी निवास करते हैं। ऐसे में यूसीसी लागू करने से उनके पारंपरिक अधिकारों और हितों पर प्रभाव पड़ सकता है।

भाजपा ने किया समर्थन

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समिति सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखते हुए काम कर रही है। भाजपा प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि समिति सभी पक्षों से सुझाव ले रही है और आदिवासी समाज के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील की।

अब राज्य सरकार की निगाह 15 अक्टूबर तक मिलने वाले सुझावों पर रहेगी, जिनके आधार पर छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

शेयर करें

By admin