Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। उसलापुर माल गोदाम शेड को शुरू किए जाने के मामले में दायर याचिकाओं पर बुधवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने तीन सप्ताह की मोहलत दे दी। इस दौरान हाईकोर्ट ने अधूरी आधारभूत सुविधाओं के बीच माल गोदाम शुरू करने की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाए।

कोर्ट ने पूछा- बारिश के बीच संचालन की क्या जरूरत?

सुनवाई के दौरान जस्टिस ए.के. प्रसाद ने रेलवे के अधिवक्ता से पूछा कि मौजूदा भारी बारिश और परिस्थितियों को देखते हुए उसलापुर माल गोदाम शेड को तत्काल शुरू करना इतना आवश्यक क्यों है। अदालत ने संकेत दिए कि किसी भी नई सुविधा का संचालन तभी होना चाहिए, जब वहां सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह उपलब्ध हों।

रेलवे और याचिकाकर्ताओं के दावे आमने-सामने

रेलवे की ओर से अदालत में दावा किया गया कि उसलापुर माल गोदाम में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने इस दावे का विरोध करते हुए ड्रोन से ली गई तस्वीरें कोर्ट के समक्ष पेश कीं। उनका कहना था कि मौके पर अभी भी कई जरूरी आधारभूत सुविधाएं अधूरी हैं और ऐसे में माल गोदाम का संचालन शुरू करना उचित नहीं होगा।

मजदूर संगठन और याचिकाकर्ताओं के बीच भी विवाद

मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले मजदूर संगठन ने दावा किया कि उनके मजदूर वर्षों से उसलापुर माल गोदाम में कार्य कर रहे हैं और अब उन्हें काम से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से इस दावे का खंडन करते हुए कहा गया कि रेलवे के वर्ष 2019 के आदेश के अनुसार उसलापुर माल गोदाम साइडिंग उसी समय से बंद थी। ऐसे में वर्षों से लगातार काम होने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

हाईकोर्ट ने विकास कार्यों का किया समर्थन

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वह विकास कार्यों के विरोध में नहीं है, लेकिन किसी भी नए माल गोदाम को पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही शुरू किया जाना चाहिए। रेलवे के सर्कुलर का हवाला देते हुए यह भी बताया गया कि माल गोदाम में वही मजदूर या संगठन कार्य करेंगे, जिन्हें संबंधित व्यापारी अधिकृत करेंगे। ऐसे अधिकृत श्रमिकों को नियमानुसार सुरक्षा के साथ काम करने की अनुमति दी जाएगी। फिलहाल हाईकोर्ट ने रेलवे को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अब अगली सुनवाई में रेलवे के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले में आगे की सुनवाई और निर्णय की दिशा तय होगी।  
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By admin