CG News: सिरकट्टी आश्रम। आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और साहित्य साधना के अद्भुत संगम के बीच 10 जून 2026 को सिरकट्टी आश्रम स्थित मानस मंच पर मानस विशारद श्री भेखलाल चंद्राकर “बी.आर. ब्रह्मांश” द्वारा रचित प्रतिष्ठित महाकाव्यात्मक कृति “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम” का भव्य विमोचन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदेशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, मानस मनीषियों, विद्वानों और रामभक्तों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। उल्लेखनीय है कि इस दिव्य कृति का पूर्व में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के करकमलों से भी विमोचन हो चुका है। सिरकट्टी आश्रम में पुनः मानस साधकों और रामभक्तों के मध्य इस ग्रंथ का लोकार्पण होने से पूरे मानस जगत में विशेष उत्साह और आनंद का वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और गोस्वामी तुलसीदास जी के जयघोषों से पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। तुलसीदास के जीवन और साधना का आध्यात्मिक दस्तावेज है यह कृति कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ के मानस जगत के वंदनीय पुरोधा नंद कुमार साहू ने कृति की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन, साधना, भक्ति और दिव्य प्रेम का आध्यात्मिक दस्तावेज है।” उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी का प्रेम सांसारिक आकर्षण या वासना का प्रतीक नहीं था, बल्कि वह निर्मल, निष्कलुष, लोकमंगलकारी और ईश्वर से आत्मा को जोड़ने वाला प्रेम था। यह कृति पाठकों को मर्यादा, करुणा, समर्पण और राममय जीवन की प्रेरणा देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों के लिए तुलसी साहित्य और रामचरितमानस परंपरा की अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा। विद्वानों और मानस मर्मज्ञों ने किया कृति का विधिवत लोकार्पण समारोह में लेखक की सुपुत्री सुश्री ऋचा चंद्राकर भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कृत डॉ. मुन्नालाल देवदास, राज मानस संघ के संरक्षक अर्जुन पुरी गोस्वामी, मानस मनीषी राम राजेश साहू, मानस पुरोधा पीला राम शर्मा, मानस मर्मज्ञ रामचंद्र विश्वकर्मा, मानस पुरोधा बलराम साहू (धर्मी), मानस प्रेमी दीपक मानिकपुरी, पंडित चेतन दुलार, खुमान सिंह ध्रुव, बालेंद्र साहू एवं प्रेमलाल साहू सहित अनेक विद्वानों और मानस प्रेमियों के करकमलों से कृति का विधिवत विमोचन किया गया। विमोचन के दौरान उपस्थित सभी अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा शैली और शोधपरक प्रस्तुति की सराहना की तथा इसे तुलसी साहित्य की परंपरा में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म को नई दिशा देगी कृति विमोचन उपरांत आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम” गोस्वामी तुलसीदास जी के व्यक्तित्व, कृतित्व, भक्ति, दर्शन और लोकमंगलकारी चिंतन का अद्वितीय एवं गहन अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह कृति न केवल मानस प्रेमियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म के क्षेत्र में भी नई दिशा प्रदान करेगी। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से दूर होता जा रहा है, ऐसे समय में यह ग्रंथ समाज को संस्कार, भक्ति और आदर्श जीवन का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भक्ति और साहित्य का अनुपम संगम बना सिरकट्टी आश्रम सिरकट्टी आश्रम का मानस मंच इस ऐतिहासिक और अविस्मरणीय अवसर का साक्षी बना, जहां भक्ति, साहित्य और संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु और मानस प्रेमी कृति के विमोचन से भावविभोर नजर आए। पूरे समारोह के दौरान वातावरण राममय बना रहा और “जय श्रीराम” तथा “गोस्वामी तुलसीदास जी की जय” के उद्घोषों से आश्रम परिसर गुंजायमान होता रहा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी विद्वानों, संतजनों और मानस प्रेमियों ने लेखक श्री भेखलाल चंद्राकर “बी.आर. ब्रह्मांश” को इस महान साहित्यिक एवं आध्यात्मिक कृति के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि “अद्भुत श्री तुलसी चरितायणम” आने वाले समय में तुलसी साहित्य और मानस परंपरा की एक महत्वपूर्ण एवं संग्रहणीय कृति के रूप में स्थापित होगी। शेयर करें Post navigation CG News: जशपुर शाखा की कार्यप्रणाली पर क्षेत्रीय प्रबंधक संतुष्ट, सुधार जारी रखने के निर्देश CG Durg News: चलती कार बनी आग का गोला, परिवार के तीन लोगों ने कूदकर बचाई जान