Chhattisgarh Bastar News: बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर दशहरा 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के बाद काछन गादी रस्म से जुड़े पनका समाज की नाराजगी सामने आई है। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित दशहरा उत्सव की प्रतीकात्मक प्रदर्शनी के दौरान परंपरा निभाने वाली बच्ची पीहू दास के बजाय दूसरी बच्ची से राष्ट्रपति की मुलाकात कराई गई। इस घटनाक्रम को लेकर समाज के लोगों ने आपत्ति जताई है। बस्तर दशहरा करीब 75 दिनों तक चलने वाला पारंपरिक आयोजन है। इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी इसमें शामिल हुई थीं। लालबाग मैदान में दशहरा की विभिन्न रस्मों पर आधारित प्रतीकात्मक प्रदर्शनी लगाई गई थी, जहां राष्ट्रपति ने काछन गादी रस्म के चित्रण के दौरान एक बच्ची से मुलाकात की। पनका समाज के अनुसार, पीहू दास पिछले तीन वर्षों से कांटों के झूले पर लेटकर काछन देवी की भूमिका निभा रही हैं। परंपरा के मुताबिक, इस रस्म के माध्यम से राजपरिवार को दशहरा मनाने की अनुमति दी जाती है। बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष और बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि प्रदर्शनी में मूल बच्ची को खड़ा करने से काछन देवी का अपमान हो सकता था। उन्होंने राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल और कार्यक्रम में सीमित लोगों की भूमिका होने का हवाला दिया। सांसद ने यह भी कहा कि मुरिया दरबार में पनका समाज के लोग मौजूद थे। उन्होंने समाज की नाराजगी दूर करने के लिए दिल्ली में राष्ट्रपति से उनकी मुलाकात कराने का प्रयास करने का आश्वासन दिया। कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने भी पनका समाज की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का बस्तर दशहरा में शामिल होना महत्वपूर्ण है, लेकिन परंपराओं के निर्वहन को लेकर शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने काछन देवी की परंपरा के साथ-साथ जोगी को समय से पहले हटाने और रथ निर्माण से जुड़े लोगों को पहले ही छुट्टी दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि राष्ट्रपति को परंपरा की जानकारी देकर उससे जुड़ी बच्ची से मुलाकात कराई जा सकती थी। इस मामले में मुख्य पुजारी गणेश दास ने भी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से जिस बच्ची की मुलाकात कराई गई, वह न तो उनके परिवार की है और न ही वे उसे जानते हैं। विवाद के बीच पनका समाज के प्रतिनिधियों ने 24 अक्टूबर को होने वाले कांटे के झूले के विसर्जन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि वे फिलहाल झूले का विसर्जन नहीं करेंगे और जिस बच्ची ने राष्ट्रपति से मुलाकात की है, वही यह रस्म निभाए। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अगले वर्ष बस्तर दशहरा में शामिल होने से दूरी बना सकते हैं। शेयर करें Post navigation Chhattisgarh Latest News: मां रणेश्वर रामचंडी के दरबार में पहुंचे CM साय, प्रदेशवासियों के मंगलमय जीवन की कामना की Dhamtari News: कभी शव देखकर डर जाते थे मोहन, आज हजारों पोस्टमार्टम कर बने मिसाल, डॉक्टर भी करते हैं तारीफ