Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच करीब चार दशक से चले आ रहे महानदी जल बंटवारा विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों द्वारा बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने पर सहमति जताई गई है। भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सांसद रूपकुमारी चौधरी ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे दोनों राज्यों के किसानों और विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष दोनों राज्यों का केंद्र की मध्यस्थता पर सहमत होना संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में सकारात्मक संकेत है। उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से चर्चा और केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से संयुक्त समिति गठित करने के अनुरोध के बाद समाधान की दिशा में गति मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक से इस लंबे विवाद का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकल सकता है। उनका कहना है कि केंद्र और दोनों राज्यों की सरकारों के समन्वय से ऐसा रास्ता निकलेगा, जिससे दोनों राज्यों के किसानों और आम जनता के हित सुरक्षित रहेंगे। महानदी जल विवाद की शुरुआत वर्ष 1983-84 में हुई थी, जब तत्कालीन मध्य प्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) द्वारा महानदी बेसिन के ऊपरी हिस्से में जल परियोजनाओं के निर्माण पर ओडिशा ने आपत्ति जताई थी। वर्ष 2016 में यह विवाद तब और गहरा गया, जब ओडिशा ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ द्वारा गैर-मानसून अवधि में भी पानी रोके जाने से हीराकुंड बांध में जल आवक प्रभावित हो रही है। इसके बाद वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया। वर्ष 2019 से 2023 के बीच दोनों राज्यों ने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपने-अपने जल उपयोग, हाइड्रोलॉजिकल आंकड़े और दावे प्रस्तुत किए, लेकिन मामला कानूनी प्रक्रिया में लंबित रहा। छत्तीसगढ़ का कहना है कि महानदी बेसिन के अपने हिस्से के जल का उपयोग कृषि, सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए करना उसका वैध अधिकार है और इससे निचले क्षेत्रों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। वहीं, ओडिशा का दावा है कि ऊपरी हिस्से में बैराज और अन्य परियोजनाओं के कारण हीराकुंड बांध में पानी की आवक कम हुई है, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई है। फिलहाल, केंद्र सरकार की मध्यस्थता और प्रस्तावित संयुक्त समिति के गठन के बाद इस बहुप्रतीक्षित जल विवाद के समाधान की उम्मीदें फिर से मजबूत होती नजर आ रही हैं। शेयर करें Post navigation Bilaspur News: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: स्टाफ की कमी बताकर चाइल्ड केयर लीव से नहीं किया जा सकता इनकार